गाय की कहानी बच्चों के लिए | Story of Ganga and Gomti Cow

 बरसों पुरानी बात है । राजगढ़ रियासत का छोटा - सा गाँव था , शेखपुरा । वहाँ गंगा और गोमती नाम की दो गायें थीं । जंगल में साथ - साथ चरने जाती । साथ - साथ वापस आती और गाँव में पहुँचकर वे एक - दूसरे को चाटकर अपने - अपने मालिक के घर चली जातीं ।

गंगा दीनू नाम के लकड़हारे की गाय वह थी । गोमती सेठ हस्तीमल की । गोमती को घर पर ही बढ़िया चारा मिलता था और गंगा को केवल भूसा । इसलिए गोमती मोटी थी और गंगा दुबली पतली । 

एक दिन गंगा ने सुंदर बछीया को जन्म दिया । दीनू और उसकी पत्नी बहुत खुश थे । गंगा के लिए गुड़ और दलिया लाने के लिए दीनू के पास रुपए नहीं थे । वह हस्तीमल के पास गया । उससे गुड़ और दलिया उधार ले आया । गंगा दो - चार दिन जंगल में चरने नहीं जा सकी । अकेली गोमती भी अपनी सहेली के बिना चरने नहीं गई । 

वह दीनू के घर के सामने आकर घूमती और गंगा भी रंथाती । दोनों की मन ही मन बातें हुआ करतीं । पर हस्तीमल को गोमती की यह आदत अच्छी न लगती थी । वह उसे जंगल में हांकने के लिए डंडे से मारने लगा । पर गोमती इधर - उधर भागकर पुनः गंगा के पास आकर खड़ी हो जाती । हस्तीमल समझ गया कि गंगा की खातिर गोमती जंगल में चरने नहीं जा रही है । वह मन ही मन दीनू और गंगा से जलने लगा । 

एक दिन उसने दीनू से गुड़ और दलिये के उधार रुपए माँग लिए । दीनू अभी रुपए लौटाने की स्थिति में नहीं था । हस्तीमल दीनू को उधार चुकाने के लिए बुरा - भला कहने लगा । 

उसने दीनू को चेतावनी दी- " यदि तुमने आठ दिन में उधार नहीं चुकाया , तो मैं दुगुना सूद वसूल करूँगा और एक माह तक नहीं चुकाया तो चौगुना । यदि तुम्हारे पास इतने रुपए नहीं हैं तो गंगा को बेच दो । 

दीनू यह अपराधी की भाँति सुनता रहा , लेकिन उसने गंगा को बेचने की बात सपने में भी नहीं सोची थी ।

कुछ दिनों बाद गंगा और गोमती पुनः साथ - साथ जंगल में चरने के लिए जाने लगीं । गंगा अपने बच्चे की याद में रहती दिन ढलते ही घर चली आती । गोमती भी उसके साथ चली आती । 

उधर हस्तीमल दीनू को परेशान करने के लिए कोई नया उपाय सोच रहा था । एक दिन शाम हो जाने पर भी गंगा घर पर नहीं आई । घर पर बछड़ा भूख के मारे बां .... बां .... चिल्ला रहा था । दीनू को बड़ी चिंता हुई । 

वह हस्तीमल के घर की ओर चल दिया , शायद गंगा वहाँ चली गई हो । पर वहाँ न गंगा थी और न गोमती । गोमती के न आने पर हस्तीमल भी परेशान था । गोमती भी अब बच्चा देने वाली थी । 

हस्तीमल और दीनू उन्हें ढूँढ़ने जंगल की ओर चल पड़े । अँधेरी रात । जंगल का खतरनाक रास्ता । जंगली जानवरों की डरावनी आवाजें । हस्तीमल दीनू के पीछे - पीछे उस बीहड़ में चला जा रहा था । दोनों अपनी - अपनी गायों के नाम लेकर पुकार रहे थे । गंगा के रंभाने की आवाज उनके कानों में पड़ी । वे आवाज की दिशा में बढ़ चले । 

कुछ समय बाद उन्हें गोमती के चील्लाने का स्वर सुनाई पड़ा । कुछ दूर चलकर उन्होंने देखा कि गंगा एक भेड़िए की तरफ लपक रही थी । भेड़िया अपना बचाव कर पुनः उधर से भागना  चाहती थी , जहाँ गोमती खड़ी - खड़ी अपने नवजात बच्चे को चाट रही थी । 

हस्तीमल और दीनू यह दृश्य देखकर चकित रह गए । उन्होंने पत्थर मारकर भेड़िये को भगाने लगे। " गंगा अपने मालिक को देखकर अब निश्चित हो गयी । दीनू ने गंगा की पीठ थपथपाई । हस्तीमल गोमती को देखकर गद्गद् हो उठा । उसने दीनू से कहा- " मित्रता हो तो इन दोनों गायों जैसी । " " भाई , गंगा ने तुम्हारा कर्ज ही नहीं चुकाया , बल्कि इसने मुझे भी अपना कर्जदार बना दिया है । 

आज से गंगा के लिए हरी घास और चारा में भेज दिया करूँगा । " यह सुन , दीनू खुश हो गया ।

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