सबसे पुरानी कहानी | मूर्ख को हिंदी mein क्या kahate hain

 एक गाँव था । सब लोग उसे ' मूखों का गौव ' कहकर पुकारते ये । उस गाँव की मूर्खता के सम्बन्ध में कई किस्से मशहूर थे । आसपास के ग्रामवासी उन किस्सों को एक दूसरे को सुनाते और खाली समय में अपना मनोरंजन करते थे । 

ऐसा ही एक किस्सा है एक बार एक यात्री इस गाँव से गुजर रहा था । प्यास के मारे उसका गला सूखा जा रहा था । तभी उसने देखा कि गाँव के किनारे कुएँ पर एक व्यक्ति नहा रहा है । यात्री जल्दी से उसके पास आया । वह विनम्रता पूर्वक बोला- “ भैया , मुझे पानी पिला दो । बड़ी जोरों से प्यास लगी है । 

 वह व्यक्ति बोला- " हाँ ... हौ ... , क्यों नहीं । " ऐसा कहते हुए वह व्यक्ति कंकड़ - पत्थर लेकर बाल्टी माजने लगा । उसने अच्छी तरह बाल्टी मांजकर कुएँ से पानी निकालने के लिए छोड़ी । कुछ क्षण बाद ही वह पानी भरी बाल्टी खींच रहा था । 

तभी अचानक राहगीर बोल पड़ा- " क्यों भाई साहब ! यह वही गाँव है , जो मूखों के गाँव के नाम से प्रसिद्ध है ? " राहगीर से यह सुनकर उस व्यक्ति का चेहरा लाल हो गया । उसे ठेस जो पहुँची थी । क्रोधित हो , रस्सी छोड़कर हाथों को नचाते हुए बोला- " भइया ! वह समय गुजर गया । अब यहाँ पर कोई मूर्ख नहीं है । " उस व्यक्ति के हाव - भाव और लच्छेदार बात सुनकर राहगीर

खूब जोर से हँसा । रस्सी छूटते ही बाल्टी कुएँ में डूब गई  बेचारे यात्री को प्यासा ही लौटना पड़ा । भाई इसी को मुर्ख कहते है हमारे यहाँ 

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