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Showing posts from March, 2022

गाय की कहानी बच्चों के लिए | Story of Ganga and Gomti Cow

 बरसों पुरानी बात है । राजगढ़ रियासत का छोटा - सा गाँव था , शेखपुरा । वहाँ गंगा और गोमती नाम की दो गायें थीं । जंगल में साथ - साथ चरने जाती । साथ - साथ वापस आती और गाँव में पहुँचकर वे एक - दूसरे को चाटकर अपने - अपने मालिक के घर चली जातीं । गंगा दीनू नाम के लकड़हारे की गाय वह थी । गोमती सेठ हस्तीमल की । गोमती को घर पर ही बढ़िया चारा मिलता था और गंगा को केवल भूसा । इसलिए गोमती मोटी थी और गंगा दुबली पतली ।  एक दिन गंगा ने सुंदर बछीया को जन्म दिया । दीनू और उसकी पत्नी बहुत खुश थे । गंगा के लिए गुड़ और दलिया लाने के लिए दीनू के पास रुपए नहीं थे । वह हस्तीमल के पास गया । उससे गुड़ और दलिया उधार ले आया । गंगा दो - चार दिन जंगल में चरने नहीं जा सकी । अकेली गोमती भी अपनी सहेली के बिना चरने नहीं गई ।  वह दीनू के घर के सामने आकर घूमती और गंगा भी रंथाती । दोनों की मन ही मन बातें हुआ करतीं । पर हस्तीमल को गोमती की यह आदत अच्छी न लगती थी । वह उसे जंगल में हांकने के लिए डंडे से मारने लगा । पर गोमती इधर - उधर भागकर पुनः गंगा के पास आकर खड़ी हो जाती । हस्तीमल समझ गया कि गंगा की खातिर गोमत...

सबसे पुरानी कहानी | मूर्ख को हिंदी mein क्या kahate hain

 एक गाँव था । सब लोग उसे ' मूखों का गौव ' कहकर पुकारते ये । उस गाँव की मूर्खता के सम्बन्ध में कई किस्से मशहूर थे । आसपास के ग्रामवासी उन किस्सों को एक दूसरे को सुनाते और खाली समय में अपना मनोरंजन करते थे ।  ऐसा ही एक किस्सा है एक बार एक यात्री इस गाँव से गुजर रहा था । प्यास के मारे उसका गला सूखा जा रहा था । तभी उसने देखा कि गाँव के किनारे कुएँ पर एक व्यक्ति नहा रहा है । यात्री जल्दी से उसके पास आया । वह विनम्रता पूर्वक बोला- “ भैया , मुझे पानी पिला दो । बड़ी जोरों से प्यास लगी है ।   वह व्यक्ति बोला- " हाँ ... हौ ... , क्यों नहीं । " ऐसा कहते हुए वह व्यक्ति कंकड़ - पत्थर लेकर बाल्टी माजने लगा । उसने अच्छी तरह बाल्टी मांजकर कुएँ से पानी निकालने के लिए छोड़ी । कुछ क्षण बाद ही वह पानी भरी बाल्टी खींच रहा था ।  तभी अचानक राहगीर बोल पड़ा- " क्यों भाई साहब ! यह वही गाँव है , जो मूखों के गाँव के नाम से प्रसिद्ध है ? " राहगीर से यह सुनकर उस व्यक्ति का चेहरा लाल हो गया । उसे ठेस जो पहुँची थी । क्रोधित हो , रस्सी छोड़कर हाथों को नचाते हुए बोला- " भइया ! वह समय गु...

साधु और राजा की कहानी | Story of ancient kings

 एक बादशाह जिसको अपने बादशाह होने पर उसे बड़ा घमंड किया करता था । इस कारण  के कारण उसके राज्य के सभी कर्मचारी परेशान रहा करते थे । वहा की प्रजा भी अधिक दुखी थी । वह बिना बात लोगों को कड़े से कड़ा दंड दे देता था । एक बार राज्य में कहीं से एक संत पधारे । बादशाह को जब इस बात का पता चला , तो उसने तरह - तरह से संत को परेशान किया । उनका अपमान करवाया ।  मगर संत ने सब कुछ सह लिया और बादशाह से कुछ नहीं कहा । जब बादशाह के खूब परेशान करने पर भी संत ने राज्य नहीं छोड़ा , तो बादशाह ने खुलेआम कहला भेजा- “ या तो तुम राज्य छोड़ दो , अन्यथा तुम्हें कोड़े लगाते हुए पूरे राज्य में घुमाया जायेगा । "  संत पर इस बात का भी कोई असर नहीं हुआ । वह खूब  उत्साहित होकर प्रवचन में लीन हो गए । राजन को यह बात बहुत ख़राब लगी । राजा ने उस संत को गिरप्तार कर अपने सम्मुख पेश करने का हुक्म भी दे दिया था । बड़े बहबुली में  सैनिक उसके पास गए और संत को गिरफ्तार कर ले गए , तुमने मेरा राज्य नहीं छोड़ा । अब तुम्हारे शरीर पर बादशाह ने संत से कहा- " मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी . अनगिनत कोड़े भी ...

बिना सेवा मेवा नहीं | Seva Ka Phal Kahani Lekhan

 बहुत पहले की बात है । जब शाहाबाद में पंडित बाबा हरगोविंद रहा करते थे । उनकी पत्नी का नाम कमला था। वह सीधे , सा धे  और ईमानदार थे । उनके रहन - सहन सादा और साहीयादा था । गाँव में उनकी अच्छी खासी पकड़ थी । उन्हें गाँव में सभी मान - सम्मान देते थे ।  पंडित व पंडिताइन दोनों प्रसन्न रहते । घर - घर पूजा पाठ करना हरगोविंद का काम था । हरगोविंद को निःसंतान होने का दुःख सालता रहता था । शाहाबाद में ही धनराज साहूकार रहता था । वह पक्का कंजूस था । वह लोगों को सूद पर रुपए देता था । अपने रुपयों को वह कठोरता से वसूलना भी जानता था ।  एक बार हरगोविंद जी भी उससे कर्जा ले ही लिया । पर समय पर धनराज का कर्जा न उतार सके । इसी बात को लेकर धनराज उन पर बरस गुर्रा पड़ा । उसने हरगोविंद को बहुत बुरा - भला बोल दिया । इतना ही नहीं , उसने हरगोविन्द को उनके मकान से ही बाहर निकाल दिया ।  हरगोविंद गाँव से बाहर एक झोंपड़ी बनाकर रहने लगे । एक बार , चौथ व्रत का त्योहार आया । सभी त्यौहार मनाने में लग गए । धनराज की पत्नी ने भी व्रत रखा । उसके घर में मिठाइयाँ बनीं , फल - फूल का प्रबंध हुआ । वहा धूमधाम से ...